Tuesday, 7 May 2024

बस इतना ही कहे

जब भी डूबता हूं 
ख्यालों के एहसास में 
चाहता हूं उचक कर साहिल को छू लूं 
कोशिश भी करता हूं 
तो पांव फिसल जाते हैं 
और हम दरिया में रह जाते हैं 
हमारी सांसे ही शायद हमारा साथ न दें 
पर एक उम्मीद ने दामन जो थाम रखा है 
कोई तो आएगा मेरा भी सहारा बनकर 
और उफनते हुए इस दिल का 
किनारा बनकर 
ढूंढता हूं मैं जिसे चांद और तारे में 
सोचता काश कभी वो भी मेरे बारे में
कितनी ही ठोकरें खाई है इस जमाने में 
कसर किसी ने भी छोड़ी न आजमाने
उम्र भर जख्म मिले 
और हम तड़पते रहे 
उनकी बस एक झलक के लिए तरसते रहे 
सुकून मिल जाता मुझे गम नहीं होता कोई 
कुछ न करता तो कोई आकर बस इतना ही कहे 
आज से हम भी तेरे साथ रहे 
आज से हम भी तेरे साथ रहे

गजल

इश्क जबसे  जवान हो गया यह 
क्या कहें हवा भी तूफान हो गया 
वफा करके भी हम बदनाम रहे 
वो गुसताखियां करके महान हो गया
कत्ल करके मेरा मासूमियत से 
देखो कैसे वो नादान हो गया 
चाहता जब भी है ठुकरा के चला जाता है 
जैसे मैं खेल का मैदान हो गया
कसूर किसको दूं 'सहर' तुम्हारे चक्कर में 
अब तो यह शहर भी शमशान हो गया

गजल

हर घड़ी मुझको यह एहसास हुआ करता है 
तेरा वजूद मेरे साथ हुआ करता है 
मौत मिल जाए मुझे दूरियां तुमसे ना बढ़े 
रात दिन रब से मेरा दिल यह दुआ करता है 
अब तो बढ़ने लगे हैं कितने ही दुश्मन अपने 
अपनी राहों में देखो कौन धुंआ करता है 
कितनी बेचैन है धड़कन ये देखो ख्वाब में भी 
सिर्फ और सिर्फ तेरे साथ हुआ करता है 
जख्मों को भी मेरे अक्सर सुकून  मिल जाता है 
कोई चुपके से मेरा हाथ छुआ करता है 
मुझ में होकर भी मेरे होने का एहसास नहीं
बेरहम कैसा 'सहर' प्यार हुआ करता है

गजल

ऐसा एक लम्हा बेखबर आया 
जिंदगी उनके नाम कर आया 
उसने बर्बाद कर दिया न जाने कितनों को 
सारा इल्जाम मेरे कर आया 
सोचा था दूर चला जाऊं उसकी दुनिया से 
हर एक कदम पर उसका घर आया 
खुदा से पहले लब पे नाम उसका आता है 
हादसा पेश ये अक्सर आया 
काश अपना उसे बना सकते 
पर कोई वक्त ना बेहतर आया

गजल

सारी दुनिया को ही डुबोया है 
आज एक शख्स इतना रोया है 
उसकी धड़कन में अब है सांस नहीं 
समझ सब समझते हैं कि वह सोया है 
हजारों टुकड़ों में बिखरा पड़ा था मेरा वजूद 
उसने एक धागे में पिरोया है 
मैं उसका क्यों ना रहूं जिसकी सूनी आंखों ने
आज दामन मेरा भिगोया है 
अब ना जी पाएंगे 'सहर' बिना उसके एक पल 
बिछड़ के उसको मैंने जिंदगी को खोया है

Sunday, 5 May 2024

एक दीवाना था

सुना है 
कि एक दीवाना था जिसने 
तुम्हारी याद में तड़प तड़प कर 
अपना दम तोड़ दिया था
सुना है 
कि उसके आंसुओं से बनी 
एक नदी आज भी वहां बहती है 
सुना है 
कि उस नदी के पानी में 
आज भी इतना दर्द है 
कि उसकी सिर्फ एक बूंद से ही 
हर कोई घुटकर अपना दम तोड़ दे 
जाओ जाकर छू लो  जरा 
एक बार उस जहरीले पानी को 
शायद अमृत बन जाए...

एक बूंद

एक दिन
गर्मी की तपिस में 
तुम्हारे से माथे से निकली हुई पसीने की वह एक बूंद 
किस कदर तुम्हारे जिस्म को शराबोर करती हुई 
समा गई थी 
इस बंदर जमीन में
उसी बूंद से निकला है 
यह पौधा शायद 
जो आज एक पेड़ बन चुका है
तब बहुत गमजदा था मैं 
कि तुम्हारे पलकों की 
एक छांव न पा सका 
मगर आज खुश हूं 
कि जिस पेड़ की छांव में मैं हूं 
वह तुम्हारी बूंद से है